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श्लोक 3.68.39  |
एवमुक्तस्तया राजन् सुदेवो द्विजसत्तम:।
सुखोपविष्ट आचष्ट दमयन्त्या यथातथम्॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! रानी के इस प्रकार पूछने पर दोनों में श्रेष्ठ सुदेव सुखपूर्वक बैठ गए और दमयन्ती का सच्चा वृत्तान्त कहने लगे॥39॥ |
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| Rajan! On being asked by the queen in this manner, Sudeva, the best of the two, sat happily and started telling the true story of Damayanti. 39॥ |
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इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि दमयन्तीसुदेवसंवादे अष्टषष्टितमोऽध्याय:॥ ६८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें दमयन्ती-सुदेव-संवादविषयक अरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६८॥
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