श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.68.38 
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं त्वत्त: सर्वमशेषत:।
तत्त्वेन हि ममाचक्ष्व पृच्छन्त्या देवरूपिणीम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्म! मैं इस देवी के समान सुन्दरी स्त्री का सम्पूर्ण वृत्तांत सुनना चाहता हूँ। मैं जो पूछता हूँ, उसे ठीक-ठीक कहिए।'॥38॥
 
'Brahman! I want to hear the entire story about this woman who is like a goddess. Tell me exactly what I ask.'॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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