श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  3.68.36-37 
तत: सुदेवमानाय्य राजमाता विशाम्पते।
पप्रच्छ भार्या कस्येयं सुता वा कस्य भाविनी॥ ३६॥
कथं च नष्टा ज्ञातिभ्यो भर्तुर्वा वामलोचना।
त्वया च विदिता विप्र कथमेवंगता सती॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब राजमाता ने सुदेव को बुलाकर पूछा- 'हे ब्राह्मण! ऐसा प्रतीत होता है कि तुम उसे जानते हो। बताओ, यह सुन्दरी कन्या किसकी पत्नी या पुत्री है? सुन्दर नेत्रों वाली यह सुन्दरी अपने भाइयों या पति से किस प्रकार विमुख हो गई है? यह पतिव्रता स्त्री ऐसी बुरी दशा को क्यों प्राप्त हुई है?॥ 36-37॥
 
Yudhishthira! Then the queen mother called Sudeva and asked- 'O Brahmin! It seems that you know her. Tell me, whose wife or daughter is this beautiful girl? How has this beautiful lady with beautiful eyes been separated from her brothers or husband? Why has this virtuous and faithful woman fallen into such a bad condition?॥ 36-37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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