श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.68.35 
अथ चेदिपतेर्माता राज्ञश्चान्त:पुरात् तदा।
जगाम यत्र सा बाला ब्राह्मणेन सहाभवत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् चेदिराज की माता भीतरी महल से निकलकर उसी स्थान पर गयीं, जहाँ राजकुमारी दमयन्ती ब्राह्मण के साथ खड़ी थी।
 
Thereafter the mother of the King of Chedi left the inner palace and went to the same place where the princess Damayanti was standing with the Brahmin. 35.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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