श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.68.34 
जनित्र्यै कथयामास सैरन्ध्री रोदितीति च।
ब्राह्मणेन सहागम्य तां वेद यदि मन्यसे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह अपनी माता के पास जाकर बोला, 'माता! सैरन्ध्री ब्राह्मण से मिलकर बहुत रो रही है। यदि आप इसे उचित समझें, तो इसका कारण जानने का प्रयत्न कीजिए।'॥34॥
 
He went to his mother and said, 'Mother! Sairandhri is crying a lot after meeting a Brahmin. If you think it is right, then try to find out the reason for this.'॥ 34॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd