श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.68.31 
बृहदश्व उवाच
अभिज्ञाय सुदेवं तं दमयन्ती युधिष्ठिर।
पर्यपृच्छत तान् सर्वान् क्रमेण सुहृद: स्वकान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं: युधिष्ठिर! सुदेव को पहचानकर दमयन्ती ने एक-एक करके अपने सभी सम्बन्धियों का कुशलक्षेम पूछा।
 
Sage Brihadashwa says: Yudhishthir! Having recognised Sudeva, Damayanti inquired one by one about the well-being of all her relatives.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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