श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.68.30 
त्वत्कृते बन्धुवर्गाश्च गतसत्त्वा इवासते।
अन्वेष्टारो ब्राह्मणाश्च भ्रमन्ति शतशो महीम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे सम्बन्धी तुम्हारे लिए चिन्ता से मरे हुए के समान हो रहे हैं। सैकड़ों ब्राह्मण पृथ्वी पर (तुम्हें खोजते हुए) फिर रहे हैं॥30॥
 
‘Your relatives are becoming like dead people out of concern for you. Hundreds of Brahmins are roaming the earth (in search of you)’॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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