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mahabharat 3.68.25: राजा नल का पराक्रम और धैर्य असीम है। उनकी पत्नी अपने पति से मिलने के लिए आतुर और व्याकुल है, अतः मुझे उनसे मिलकर उन्हें आश्वस्त करना होगा। 25.   |   mahabharat अध्याय 3.68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.68.25 
युक्तं तस्याप्रमेयस्य वीर्यसत्त्ववतो मया।
समाश्वासयितुं भार्यां पतिदर्शनलालसाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा नल का पराक्रम और धैर्य असीम है। उनकी पत्नी अपने पति से मिलने के लिए आतुर और व्याकुल है, अतः मुझे उनसे मिलकर उन्हें आश्वस्त करना होगा। 25.
 
King Nal's valour and patience are boundless. His wife is eager and anxious to see her husband, so I must meet her and assure her. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)