vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना
»
श्लोक 25
श्लोक
3.68.25
युक्तं तस्याप्रमेयस्य वीर्यसत्त्ववतो मया।
समाश्वासयितुं भार्यां पतिदर्शनलालसाम्॥ २५॥
अनुवाद
राजा नल का पराक्रम और धैर्य असीम है। उनकी पत्नी अपने पति से मिलने के लिए आतुर और व्याकुल है, अतः मुझे उनसे मिलकर उन्हें आश्वस्त करना होगा। 25.
King Nal's valour and patience are boundless. His wife is eager and anxious to see her husband, so I must meet her and assure her. 25.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×