श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.68.23 
अस्या नूनं पुनर्लाभान्नैषध: प्रीतिमेष्यति।
राजा राज्यपरिभ्रष्ट: पुनर्लब्ध्वा च मेदिनीम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जैसे राजा अपना राज्य खोकर उसी भूमि को पुनः पाकर अत्यन्त प्रसन्न होता है, वैसे ही उसे पुनः पाकर निषधियों के राजा नल भी अवश्य ही अत्यन्त प्रसन्न होंगे॥23॥
 
Just as a king, after losing his kingdom, feels very happy on regaining the same land, similarly, on getting it back, Nala, the king of Nishadhans, will surely be very happy. ॥23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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