श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.68.19 
भर्ता नाम परं नार्या भूषणं भूषणैर्विना।
एषा हि रहिता तेन शोभमाना न शोभते॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में स्त्री का पति ही उसका सर्वोत्तम आभूषण है। उसके होने से वह बिना किसी आभूषण के भी सुन्दर लगती है; किन्तु पति के आभूषण से रहित होने के कारण वह सुन्दर होते हुए भी सुन्दर नहीं लगती॥19॥
 
In reality, a woman's husband is her best ornament. Because of his presence, she looks beautiful even without any ornaments; but because she is devoid of the ornament of her husband, she is not looking beautiful even though she is beautiful.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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