Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.68.18: यह राजकुमारी अपने प्रिय विषय-भोगों से वंचित है। यह अपने स्वजनों से विमुख है और पति के दर्शन की इच्छा से इस (दरिद्र एवं दुर्बल) शरीर को धारण कर रही है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.68.18 
कामभोगै: प्रियैर्हीनां हीनां बन्धुजनेन च।
देहं संधारयन्तीं हि भर्तृदर्शनकाङ्क्षया॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यह राजकुमारी अपने प्रिय विषय-भोगों से वंचित है। यह अपने स्वजनों से विमुख है और पति के दर्शन की इच्छा से इस (दरिद्र एवं दुर्बल) शरीर को धारण कर रही है॥18॥
 
This princess is deprived of her beloved sexual pleasures. She is separated from her relatives and is wearing this (poor and weak) body in the desire of seeing her husband.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)