श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.68.11 
पूर्णचन्द्रनिभां श्यामां चारुवृत्तपयोधराम्।
कुर्वन्तीं प्रभया देवीं सर्वा वितिमिरा दिश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यह श्यामवर्णी कन्या पूर्ण चन्द्रमा के समान कांतिमान है। इसके स्तन अत्यंत सुन्दर हैं। यह देवी अपने तेज से समस्त दिशाओं को प्रकाशित कर रही है ॥11॥
 
This dark-skinned girl is as radiant as the full moon. Her breasts are very beautiful. This goddess is illuminating all directions with her radiance. ॥ 11॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd