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mahabharat 3.68.1: महर्षि बृहदश्व कहते हैं: हे राजन! राज्य हरण के पश्चात राजा नल अपनी पत्नी सहित वन में चले गए। तब विदर्भ के राजा भीम ने नल की खोज के लिए अनेक ब्राह्मणों को भेजा।   |   mahabharat अध्याय 3.68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 68: विदर्भराजका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको भेजना, सुदेव ब्राह्मणका चेदिराजके भवनमें जाकर मन-ही-मन दमयन्तीके गुणोंका चिन्तन और उससे भेंट करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.68.1 
बृहदश्व उवाच
हृतराज्ये नले भीम: सभार्ये च वनं गते।
द्विजान् प्रस्थापयामास नलदर्शनकाङ्क्षया॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं: हे राजन! राज्य हरण के पश्चात राजा नल अपनी पत्नी सहित वन में चले गए। तब विदर्भ के राजा भीम ने नल की खोज के लिए अनेक ब्राह्मणों को भेजा।
 
Sage Brihadashwa says: O King! After the abduction of his kingdom, King Nala and his wife went to the forest. Then King Bhima of Vidarbha sent a number of Brahmins to search for Nala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)