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mahabharat 3.67.9: वे वहाँ निरन्तर दमयन्ती का चिन्तन करते रहते थे। प्रत्येक संध्या वे यह श्लोक पढ़ते थे:॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.67.9 
स वै तत्रावसद् राजा वैदर्भीमनुचिन्तयन्।
सायं सायं सदा चेमं श्लोकमेकं जगाद ह॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वे वहाँ निरन्तर दमयन्ती का चिन्तन करते रहते थे। प्रत्येक संध्या वे यह श्लोक पढ़ते थे:॥9॥
 
He lived there constantly thinking of Damayanti. Every evening he recited this one verse:॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)