श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.67.8 
बृहदश्व उवाच
एवमुक्तो नलस्तेन न्यवसत् तत्र पूजित:।
ऋतुपर्णस्य नगरे सहवार्ष्णेयजीवल:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं - हे राजन! राजा के ऐसा कहने पर नल, वार्ष्णेय और जीवल के साथ ऋतुपर्ण नगर में आदरपूर्वक रहने लगे।
 
Sage Brihadashwa says: O King! Upon the King's saying this, Nala, along with Varshneya and Jivala, began to live respectfully in the city of Rituparna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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