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mahabharat 3.67.6: इसलिए, तुम्हें मेरे घोड़ों को और तेज़ दौड़ाने का कोई तरीका ढूँढ़ना चाहिए। आज से तुम हमारे घुड़सवार हो। तुम्हारा वार्षिक वेतन दस हज़ार सिक्के है।   |   mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.67.6 
स त्वमातिष्ठ योगं तं येन शीघ्रा हया मम।
भवेयुरश्वाध्यक्षोऽसि वेतनं ते शतं शतम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इसलिए, तुम्हें मेरे घोड़ों को और तेज़ दौड़ाने का कोई तरीका ढूँढ़ना चाहिए। आज से तुम हमारे घुड़सवार हो। तुम्हारा वार्षिक वेतन दस हज़ार सिक्के है।
 
Therefore, you should find a way to make my horses run faster. From today, you are our horse-rider. Your annual salary is ten thousand coins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)