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mahabharat 3.67.4: 'मैं इस संसार में जितने भी शिल्पकला आदि अत्यन्त कठिन कार्य हैं, उन्हें भली-भाँति करने का प्रयत्न कर सकता हूँ। हे राजा ऋतुपर्ण! कृपया मेरी सहायता कीजिए।'॥4॥   |   mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.67.4 
यानि शिल्पानि लोकेऽस्मिन् यच्चैवान्यत् सुदुष्करम्।
सर्वं यतिष्ये तत् कर्तुमृतुपर्ण भरस्व माम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'मैं इस संसार में जितने भी शिल्पकला आदि अत्यन्त कठिन कार्य हैं, उन्हें भली-भाँति करने का प्रयत्न कर सकता हूँ। हे राजा ऋतुपर्ण! कृपया मेरी सहायता कीजिए।'॥4॥
 
'I can try to do all the craftsmanship and other tasks which are extremely difficult in this world very well. O King Rituparna! Please provide for me.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)