श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.67.2 
स राजानमुपातिष्ठद् बाहुकोऽहमिति ब्रुवन्।
अश्वानां वाहने युक्त: पृथिव्यां नास्ति मत्सम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह बाहुक नाम से अपना परिचय देकर राजा ऋतुपर्ण के समक्ष उपस्थित हुआ और बोला, 'घोड़ों को हांकने की कला में इस पृथ्वी पर मेरे समान कोई नहीं है।॥ 2॥
 
Introducing himself by the name of Bahuk, he appeared before King Rituparna and said, 'There is no one on this earth like me in the art of driving horses.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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