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mahabharat 3.67.18-19: भूख-प्यास उसके शरीर को कष्ट दे रही थी। यदि वह उस अवस्था में त्याग दिया जाए, तो भी उसका जीवित रहना बहुत कठिन होगा। हे महात्मा! उस अत्यन्त भयानक और विशाल वन में, जहाँ भयंकर पशु विचरण करते हैं, उस मंदबुद्धि और अभागे पुरुष ने उसे त्याग दिया था। इस प्रकार निषादराज नल, राजा ऋतुपर्ण के यहाँ वनवास में रहते हुए, दमयन्ती का निरन्तर स्मरण करते रहते थे॥18-19॥   |   mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.67.18-19 
क्षुत्पिपासापरीताङ्गी दुष्करं यदि जीवति।
श्वापदाचरिते नित्यं वने महति दारुणे॥ १८॥
त्यक्ता तेनाल्पभाग्येन मन्दप्रज्ञेन मारिष।
इत्येवं नैषधो राजा दमयन्तीमनुस्मरन्॥
अज्ञातवासं न्यवसद् राज्ञस्तस्य निवेशने॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भूख-प्यास उसके शरीर को कष्ट दे रही थी। यदि वह उस अवस्था में त्याग दिया जाए, तो भी उसका जीवित रहना बहुत कठिन होगा। हे महात्मा! उस अत्यन्त भयानक और विशाल वन में, जहाँ भयंकर पशु विचरण करते हैं, उस मंदबुद्धि और अभागे पुरुष ने उसे त्याग दिया था। इस प्रकार निषादराज नल, राजा ऋतुपर्ण के यहाँ वनवास में रहते हुए, दमयन्ती का निरन्तर स्मरण करते रहते थे॥18-19॥
 
‘Hunger and thirst were afflicting his body. Even if he were to survive after being abandoned in that condition, it would be very difficult for him to survive. O noble soul! In a very dreadful and vast forest where ferocious animals roam around, that dull-witted and unfortunate man had abandoned him.’ Thus, the king of Nishadhans, Nala, was living in exile at the place of king Rituparna, constantly remembering Damayanti.॥ 18-19॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि नलविलापे सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें नलविलापविषयक सड़सठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)