Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.67.14: वह मंदबुद्धि पुरुष अपनी पत्नी से वियोग में शोक की अग्नि से जला हुआ और दुःख से पीड़ित होकर आलस्य से रहित होकर दिन-रात इधर-उधर घूमता रहता है॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विप्रयुक्त: स मन्दात्मा भ्रमत्यसुखपीडित:।
दह्यमान: स शोकेन दिवारात्रमतन्द्रित:॥ १४॥
अनुवाद
वह मंदबुद्धि पुरुष अपनी पत्नी से वियोग में शोक की अग्नि से जला हुआ और दुःख से पीड़ित होकर आलस्य से रहित होकर दिन-रात इधर-उधर घूमता रहता है॥ 14॥
‘Separated from his wife, that dull-witted man, burnt by the fire of grief and suffering from sorrow, wanders here and there day and night, devoid of laziness.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥