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mahabharat 3.67.12-13: 'आयुष्मान्! वह कौन सी पत्नी है जिसके लिए तुम इस प्रकार निरन्तर शोक कर रहे हो?' तब राजा नल ने उनसे कहा - 'एक अल्पबुद्धि पुरुष की पत्नी अत्यंत आदर करने योग्य थी। परन्तु उस पुरुष के वचन दृढ़ नहीं थे। वह अपनी प्रतिज्ञा से विमुख हो गया। किसी विशेष प्रयोजन से विवश होकर वह अभागा पुरुष अपनी पत्नी से विमुख हो गया।॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  3.67.12-13 
आयुष्मन् कस्य वा नारी यामेवमनुशोचसि।
तमुवाच नलो राजा मन्दप्रज्ञस्य कस्यचित्॥ १२॥
आसीद् बहुमता नारी तस्यादृढतरं वच:।
स वै केनचिदर्थेन तया मन्दो व्ययुज्यत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'आयुष्मान्! वह कौन सी पत्नी है जिसके लिए तुम इस प्रकार निरन्तर शोक कर रहे हो?' तब राजा नल ने उनसे कहा - 'एक अल्पबुद्धि पुरुष की पत्नी अत्यंत आदर करने योग्य थी। परन्तु उस पुरुष के वचन दृढ़ नहीं थे। वह अपनी प्रतिज्ञा से विमुख हो गया। किसी विशेष प्रयोजन से विवश होकर वह अभागा पुरुष अपनी पत्नी से विमुख हो गया।॥12-13॥
 
'Aayushman! Whose wife is she for whom you are constantly grieving like this?' Then King Nala said to him - 'A man of little wisdom had a wife who was worthy of his utmost respect. But the man's words were not very firm. He slipped away from his vow. Compelled by some special purpose, that unfortunate man got separated from his wife.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)