श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.67.11 
एवं ब्रुवन्तं राजानं निशायां जीवलोऽब्रवीत्।
कामेनां शोचसे नित्यं श्रोतुमिच्छामि बाहुक॥ ११॥
 
 
अनुवाद
एक रात जब राजा इस प्रकार बोल रहे थे, तब जीवल ने पूछा, "बाहुक! मैं सुनना चाहता हूँ कि तुम प्रतिदिन किस स्त्री के लिए विलाप करते हो?"
 
One night, when the king was speaking in this manner, Jivala asked, "Bahuk! I want to hear for which woman do you mourn every day?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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