श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.67.10 
क्वनु सा क्षुत्पिपासार्ता श्रान्ता शेते तपस्विनी।
स्मरन्ती तस्य मन्दस्य कं वा साद्योपतिष्ठति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वह तपस्विनी स्त्री थकी हुई और भूखी होकर उस मंदबुद्धि पुरुष का स्मरण करती हुई कहाँ सोती होगी और अब किसके पास रहती होगी?॥10॥
 
'Where would that ascetic woman, tired and hungry, be sleeping while remembering that dim-witted man and near whom would she be staying now?'॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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