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mahabharat 3.67.1: महर्षि बृहदश्व कहते हैं: कर्कोटक नाग के लुप्त होने के बाद, दसवें दिन निषधन के राजा नल ने राजा ऋतुपर्ण की नगरी में प्रवेश किया।   |   mahabharat अध्याय 3.67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 67: राजा नलका ऋतुपर्णके यहाँ अश्वाध्यक्षके पदपर नियुक्त होना और वहाँ दमयन्तीके लिये निरन्तर चिन्तित रहना तथा उनकी जीवलसे बातचीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.67.1 
बृहदश्व उवाच
तस्मिन्नन्तर्हिते नागे प्रययौ नैषधो नल:।
ऋतुपर्णस्य नगरं प्राविशद् दशमेऽहनि॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं: कर्कोटक नाग के लुप्त होने के बाद, दसवें दिन निषधन के राजा नल ने राजा ऋतुपर्ण की नगरी में प्रवेश किया।
 
Sage Brihadashwa says: After the disappearance of the serpent Karkotaka, on the tenth day the King of Nishadhan, Nala, entered the city of King Rituparna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)