श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.66.8 
सखा च ते भविष्यामि मत्समो नास्ति पन्नग:।
लघुश्च ते भविष्यामि शीघ्रमादाय गच्छ माम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'मैं भी तुम्हारा मित्र बनूँगा। सर्पों में मेरे समान कोई भी शक्तिशाली नहीं है। मैं तुम्हारे लिए प्रकाश बन जाऊँगा। तुम मुझे अपने साथ लेकर शीघ्र ही यहाँ से चले जाओ।'॥8॥
 
'I will also become your friend. There is no one as powerful as me amongst the snakes. I will become light for you. You should take me with you and leave from here quickly.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)