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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.66.7 
तस्य शापान्न शक्तोऽस्मि पदाद् विचलितुं पदम्।
उपदेक्ष्यामि ते श्रेयस्त्रातुमर्हति मां भवान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! नारदजी के शाप के कारण मैं एक कदम भी चलने में असमर्थ हूँ; कृपया मेरी रक्षा करें, मैं आपको कुछ हितकर उपदेश दूँगा।
 
'O King! Due to the curse of Narada I am unable to take even one step; please save me, I will give you some beneficial advice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)