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mahabharat 3.66.25: ‘इस वस्त्र से आच्छादित होते ही तुम अपना मूल रूप प्राप्त कर लोगे।’ ऐसा कहकर सर्प ने उसे दो दिव्य वस्त्र दिये।   |   mahabharat अध्याय 3.66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.66.25 
अनेन वाससाच्छन्न: स्वं रूपं प्रतिपत्स्यसे।
इत्युक्त्वा प्रददौ तस्मै दिव्यं वासोयुगं तदा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘इस वस्त्र से आच्छादित होते ही तुम अपना मूल रूप प्राप्त कर लोगे।’ ऐसा कहकर सर्प ने उसे दो दिव्य वस्त्र दिये।
 
'As soon as you are covered with this cloth, you will regain your original form.' Saying so, the serpent gave him two divine cloths. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)