श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.66.18 
न ते भयं नरव्याघ्र दंष्ट्रिभ्य: शत्रुतोऽपि वा।
ब्रह्मविद्भॺश्च भविता मत्प्रसादान्नराधिप॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे व्याघ्रराज! मेरी कृपा से तुम्हें कभी भी दंतहीन पशुओं, शत्रुओं, वेदवेत्ताओं के शाप आदि का भय नहीं रहेगा॥ 18॥
 
'O tiger king! By my grace you will never have to fear the animals with fangs, the enemies, the curses of the scholars of Vedas, etc.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)