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mahabharat 3.66.17: हे मनुष्यों के स्वामी! तुम छल-कपट से कष्ट पाने के योग्य नहीं थे, फिर भी जिस मनुष्य ने तुम्हारे बिना किसी दोष के तुम्हारे साथ छल किया था, उस पर क्रोध की दृष्टि डालकर मैंने तुम्हारी रक्षा की है॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 3.66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.66.17 
अनागा येन निकृतस्त्वमनर्हो जनाधिप।
क्रोधादसूययित्वा तं रक्षा मे भवत: कृता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! तुम छल-कपट से कष्ट पाने के योग्य नहीं थे, फिर भी जिस मनुष्य ने तुम्हारे बिना किसी दोष के तुम्हारे साथ छल किया था, उस पर क्रोध की दृष्टि डालकर मैंने तुम्हारी रक्षा की है॥ 17॥
 
'O Lord of men! You were not worthy of being harassed by deceit and fraud, yet I have protected you by looking with anger at the person who had treated you deceitfully without any fault of yours.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)