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mahabharat 3.66.16: कलियुग के समस्त अंग मेरे विष से व्याप्त हो जाएँगे। महाराज! जब तक वह आपको छोड़कर नहीं जाएगा, तब तक वह आपके भीतर महान दुःख के साथ निवास करेगा॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 66: राजा नलके द्वारा दावानलसे कर्कोटक नागकी रक्षा तथा नागद्वारा नलको आश्वासन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.66.16 
विषेण संवृतैर्गात्रैर्यावत् त्वां न विमोक्ष्यति।
तावत् त्वयि महाराज दु:खं वै स निवत्स्यति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कलियुग के समस्त अंग मेरे विष से व्याप्त हो जाएँगे। महाराज! जब तक वह आपको छोड़कर नहीं जाएगा, तब तक वह आपके भीतर महान दुःख के साथ निवास करेगा॥16॥
 
'All the parts of Kaliyuga will be permeated with my poison. Maharaj! Until he leaves you, he will live within you with great sorrow.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)