श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  3.65.76 
स तत्र पूज्यमाना वै दमयन्ती व्यनन्दत।
सर्वकामै: सुविहितैर्निरुद्वेगावसत् तदा॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
सुनंदा ने दमयंती की इच्छानुसार सारी व्यवस्था कर दी और उसका बहुत आदर-सत्कार करने लगी। इससे दमयंती बहुत प्रसन्न हुई और वह बिना किसी तनाव के वहाँ रहने लगी।
 
Sunanda made all arrangements as per Damayanti's wishes and started treating her with great respect and honour. This made Damayanti very happy and she started living there without any tension.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि दमयन्तीचेदिराजगृहवासे पञ्चषष्टितमोऽध्याय:॥ ६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें निवासविषयक पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६५॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas