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श्लोक 3.65.68  |
उच्छिष्टं नैव भुञ्जीयां न कुर्यां पादधावनम्।
न चाहं पुरुषानन्यान् प्रभाषेयं कथंचन॥ ६८॥ |
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| अनुवाद |
| ‘मैं किसी का जूठा नहीं खाऊँगा, किसी के पैर नहीं धोऊँगा और किसी परपुरुष से किसी प्रकार भी बात नहीं करूँगा ॥ 68॥ |
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| ‘I will not eat anyone's leftovers, I will not wash anyone's feet and I will not talk to any other man in any way.॥ 68॥ |
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