Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.65.64-65: भीम की पुत्री दमयंती की आँखें आँसुओं से भर आईं और वह अत्यंत दुःखी स्वर में विलाप कर रही थी। राजमाता स्वयं उसके दुःख से दुखी होकर बोलीं - 'कल्याणी! तुम मेरे पास रहो। मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हूँ। प्रिये! मेरे सेवक तुम्हारे पति की खोज करेंगे।' | mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीम की पुत्री दमयंती की आँखें आँसुओं से भर आईं और वह अत्यंत दुःखी स्वर में विलाप कर रही थी। राजमाता स्वयं उसके दुःख से दुखी होकर बोलीं - 'कल्याणी! तुम मेरे पास रहो। मैं तुमसे बहुत प्रेम करती हूँ। प्रिये! मेरे सेवक तुम्हारे पति की खोज करेंगे।'
Bhima's daughter Damayanti's eyes were filled with tears and she was wailing in a very sorrowful voice. The queen mother herself was saddened by her sorrow and said - 'Kalyani! You stay with me. I love you very much. Dear one! My servants will search for your husband.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥