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mahabharat 3.65.6-7: फिर आधी रात के समय जब कहीं से कोई शब्द सुनाई नहीं दे रहा था और उस समूह के सभी लोग थककर सो गए थे, तब (जंगली) हाथियों का एक झुंड पहाड़ी नदी के कीचड़ भरे पानी में पानी पीने आया, जिसमें हाथियों की मदमस्त धारा बह रही थी। उस झुंड ने सोए हुए व्यापारियों के समूह को और उनके साथ आए बहुत से हाथियों को भी देखा।   |   mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  3.65.6-7 
अथार्धरात्रसमये नि:शब्दस्तिमिते तदा।
सुप्ते सार्थे परिश्रान्ते हस्तियूथमुपागमत्॥ ६॥
पानीयार्थं गिरिनदीं मदप्रस्रवणाविलाम्।
अथापश्यत सार्थं तं सार्थजान् सुबहून् गजान्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
फिर आधी रात के समय जब कहीं से कोई शब्द सुनाई नहीं दे रहा था और उस समूह के सभी लोग थककर सो गए थे, तब (जंगली) हाथियों का एक झुंड पहाड़ी नदी के कीचड़ भरे पानी में पानी पीने आया, जिसमें हाथियों की मदमस्त धारा बह रही थी। उस झुंड ने सोए हुए व्यापारियों के समूह को और उनके साथ आए बहुत से हाथियों को भी देखा।
 
Then, at midnight, when no sound was heard from anywhere and all the people of that group had fallen asleep due to exhaustion, a herd of (wild) elephants came to drink water from the muddy water of the mountain river, which was flowing with the drunken stream of elephants. That herd saw the sleeping group of traders and also the many elephants that had come with them. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)