श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.65.54 
तच्छ्रुत्वा वचनं तस्या भैमी वचनमब्रवीत्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उनके वचन सुनकर भीमाकुमारी बोलीं-॥54॥
 
Hearing his words, Bhimakumari said -॥ 54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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