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mahabharat 3.65.50: लोग उसे सता रहे हैं। यह विपन्न बालिका किसी आश्रय की खोज में है। मैं उसकी सुन्दरता को ऐसा देख रहा हूँ कि वह मेरे घर को प्रकाशित कर देगी॥50॥   |   mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.65.50 
जनेन क्लिश्यते बाला दु:खिता शरणार्थिनी।
तादृग् रूपं च पश्यामि विद्योतयति मे गृहम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
लोग उसे सता रहे हैं। यह विपन्न बालिका किसी आश्रय की खोज में है। मैं उसकी सुन्दरता को ऐसा देख रहा हूँ कि वह मेरे घर को प्रकाशित कर देगी॥50॥
 
‘People are harassing her. This distressed girl is looking for some shelter. I see her beauty as such that it will illuminate my house.॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)