Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.65.2-3: तत्पश्चात् बहुत समय बीतने पर एक विशाल एवं भयानक वन में पहुँचकर उन व्यापारियों ने एक महान् सरोवर देखा, जिसका नाम पद्मसौगंधिक था। वह सब ओर से शुभ प्रतीत हो रहा था। उस सुन्दर सरोवर के पास घास और ईंधन प्रचुर मात्रा में थे, तथा वहाँ फूल और फल भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे। उस सरोवर पर अनेक पक्षी रहते थे॥2-3॥ | mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् बहुत समय बीतने पर एक विशाल एवं भयानक वन में पहुँचकर उन व्यापारियों ने एक महान् सरोवर देखा, जिसका नाम पद्मसौगंधिक था। वह सब ओर से शुभ प्रतीत हो रहा था। उस सुन्दर सरोवर के पास घास और ईंधन प्रचुर मात्रा में थे, तथा वहाँ फूल और फल भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे। उस सरोवर पर अनेक पक्षी रहते थे॥2-3॥
Thereafter, after a long time, reaching a huge and dreadful forest, those merchants saw a great lake, whose name was Padmasaugandhik. It appeared auspicious from all sides. There was abundance of grass and fuel near that beautiful lake, flowers and fruits were also available there in abundance. Many birds lived on that lake.॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥