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mahabharat 3.65.19: जब यह भयंकर संहार हो रहा था, तब दमयन्ती भी जाग उठी और उसका हृदय भय से भर गया॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.65.19 
तस्मिंस्तथा वर्तमाने दारुणे जनसंक्षये।
दमयन्ती च बुबुधे भयसंत्रस्तमानसा॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब यह भयंकर संहार हो रहा था, तब दमयन्ती भी जाग उठी और उसका हृदय भय से भर गया॥19॥
 
When this terrible carnage was taking place, Damayanti also woke up. Her heart was filled with fear.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)