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mahabharat 3.65.15: हे राजन! इस प्रकार दैवी हस्तक्षेप से अनेक जंगली हाथियों ने आक्रमण करके सम्पूर्ण समृद्ध वणिक समुदाय को (लगभग) नष्ट कर दिया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.65.15 
एवं प्रकारैर्बहुभिर्दैवेनाक्रम्य हस्तिभि:।
राजन् विनिहतं सर्वं समृद्धं सार्थमण्डलम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार दैवी हस्तक्षेप से अनेक जंगली हाथियों ने आक्रमण करके सम्पूर्ण समृद्ध वणिक समुदाय को (लगभग) नष्ट कर दिया॥15॥
 
O King! In this way, by divine intervention, many wild elephants attacked and (almost) destroyed the entire prosperous community of merchants. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)