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mahabharat 3.65.10: उन वन के हाथियों का वन मार्ग अवरुद्ध हो गया था, जो ग्रामीण हाथियों पर आक्रमण करने का प्रयत्न कर रहे थे। व्यापारियों का एक बड़ा समूह सरोवर के किनारे सो रहा था, और उनका मार्ग अवरुद्ध कर रहा था॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.65.10 
स्पन्दतामपि नागानां मार्गा नष्टा वनोद्भवा:।
मार्गं संरुध्य संसुप्तं पद्मिन्या: सार्थमुत्तमम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उन वन के हाथियों का वन मार्ग अवरुद्ध हो गया था, जो ग्रामीण हाथियों पर आक्रमण करने का प्रयत्न कर रहे थे। व्यापारियों का एक बड़ा समूह सरोवर के किनारे सो रहा था, और उनका मार्ग अवरुद्ध कर रहा था॥10॥
 
The forest path of those forest elephants who were trying to attack the rural elephants was blocked. A large group of traders were sleeping on the bank of the lake, blocking their path.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)