Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.65.1: महर्षि बृहदश्व कहते हैं: हे राजन! समूह के नेता के वचन सुनकर निष्कलंक और सुन्दर शरीर वाली दमयन्ती अपने पति को देखने के लिए उत्सुक हो गयी और व्यापारियों के उस समूह के साथ यात्रा करने लगी।   |   mahabharat अध्याय 3.65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 65: जंगली हाथियोंद्वारा व्यापारियोंके दलका सर्वनाश तथा दु:खित दमयन्तीका चेदिराजके भवनमें सुखपूर्वक निवास  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.65.1 
बृहदश्व उवाच
सा तच्छ्रुत्वानवद्याङ्गी सार्थवाहवचस्तदा।
जगाम सह तेनैव सार्थेन पतिलालसा॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं: हे राजन! समूह के नेता के वचन सुनकर निष्कलंक और सुन्दर शरीर वाली दमयन्ती अपने पति को देखने के लिए उत्सुक हो गयी और व्यापारियों के उस समूह के साथ यात्रा करने लगी।
 
Sage Brihadaswa says: O King! On hearing the words of the leader of the group, Damayanti, who had flawless and beautiful body, became eager to see her husband and started travelling along with that group of traders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)