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श्लोक 3.64.98  |
किं नु स्वप्नो मया दृष्ट: कोऽयं विधिरिहाभवत्।
क्व नु ते तापसा: सर्वे क्व तदाश्रममण्डलम्॥ ९८॥ |
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| अनुवाद |
| (उसने सोचा -) 'क्या मैंने कोई स्वप्न देखा है? यहाँ कैसी विचित्र घटना घटी है? वे सब तपस्वी कहाँ चले गए और वह आश्रममण्डल कहाँ है?'॥98॥ |
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| (He thought -) 'Have I seen a dream? What kind of strange incident has happened here? Where have all those ascetics gone and where is that ashram mandal?'॥98॥ |
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