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mahabharat 3.64.97: उस समय राजा वीरसेन की पुत्रवधू दमयन्ती, जो अत्यन्त सुन्दर थी, यह अद्भुत वस्तु देखकर आश्चर्यचकित हो गयी।   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  3.64.97 
सा दृष्ट्वा महदाश्चर्यं विस्मिता ह्यभवत् तदा।
दमयन्त्यनवद्याङ्गी वीरसेननृपस्नुषा॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
उस समय राजा वीरसेन की पुत्रवधू दमयन्ती, जो अत्यन्त सुन्दर थी, यह अद्भुत वस्तु देखकर आश्चर्यचकित हो गयी।
 
At that time King Veerasena's daughter-in-law, Damayanti, who was very beautiful, was astonished to see this wonderful thing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)