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mahabharat 3.64.85-86: मेरे पति महामना नल युद्धकला में निपुण हैं और समस्त अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता हैं। मैं वन, पर्वत, सरोवर, नदी, घाटियों और समस्त वनों में कष्ट सहती हुई उनकी खोज में घूमती रहती हूँ॥ 85-86॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 85-86
 
 
श्लोक  3.64.85-86 
सा वनानि गिरींश्चैव सरांसि सरितस्तथा।
पल्वलानि च सर्वाणि तथारण्यानि सर्वश:॥ ८५॥
अन्वेषमाणा भर्तारं नलं रणविशारदम्।
महात्मानं कृतास्त्रं च विचरामीह दु:खिता॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
मेरे पति महामना नल युद्धकला में निपुण हैं और समस्त अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता हैं। मैं वन, पर्वत, सरोवर, नदी, घाटियों और समस्त वनों में कष्ट सहती हुई उनकी खोज में घूमती रहती हूँ॥ 85-86॥
 
‘My husband Mahamana Nala is skilled in the art of war and is an expert in all weapons. I roam around in search of him in pain in the forests, mountains, lakes, rivers, pits and all jungles.॥ 85-86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)