Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.64.82-83: 'उसने युद्ध में अनेक शत्रुओं का वध किया है। वह सूर्य और चन्द्रमा के समान तेजस्वी और तेजस्वी है।' एक दिन कुछ धूर्त, अजेय, असभ्य, कपटी और कुशल जुआरियों ने सत्यनिष्ठ और धर्मात्मा राजा नल को जुआ खेलने के लिए आमंत्रित किया और उनका सारा राज्य और धन लूट लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 82-83
 
 
श्लोक  3.64.82-83 
सपत्नानां मृधे हन्ता रविसोमसमप्रभ:।
स कैश्चिन्निकृतिप्रज्ञैरनार्यैरकृतात्मभि:॥ ८२॥
आहूय पृथिवीपाल: सत्यधर्मपरायण:।
देवने कुशलैर्जिह्मैर्हृतं राज्यं वसूनि च॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
'उसने युद्ध में अनेक शत्रुओं का वध किया है। वह सूर्य और चन्द्रमा के समान तेजस्वी और तेजस्वी है।' एक दिन कुछ धूर्त, अजेय, असभ्य, कपटी और कुशल जुआरियों ने सत्यनिष्ठ और धर्मात्मा राजा नल को जुआ खेलने के लिए आमंत्रित किया और उनका सारा राज्य और धन लूट लिया।
 
‘He has killed many enemies in war. He is as radiant and lustrous as the Sun and the Moon. One day some cunning, unconquerable, uncivilized, deceitful and expert gamblers invited the truthful and righteous King Nala for gambling and robbed him of his entire kingdom and wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)