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श्लोक 3.64.68  |
साभिवाद्य तपोवृद्धान् विनयावनता स्थिता।
स्वागतं त इति प्रोक्ता तै: सर्वैस्तापसोत्तमै:॥ ६८॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ वह ऋषियों को प्रणाम करके उनके पास नम्रतापूर्वक खड़ी हो गई। तब वहाँ उपस्थित समस्त महातपस्वीगणों ने उससे कहा - 'देवि! आपका स्वागत है।'॥68॥ |
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| There she bowed before the sages and stood humbly beside them. Then all the great ascetics there said to her - 'Devi! You are most welcome.'॥ 68॥ |
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