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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.64.60 
इति सा तं गिरिश्रेष्ठमुक्त्वा पार्थिवनन्दिनी।
दमयन्ती ततो भूयो जगाम दिशमुत्तराम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
उस महान पर्वत से ऐसा कहकर राजकुमारी दमयंती वहाँ से उत्तर दिशा की ओर चली गईं।
 
Having thus spoken to that great mountain, Princess Damayanti then departed from there towards the north.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)