Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.57-59h: निषादराज नल की वह मधुर वाणी, जो मेघों की गर्जना के समान मधुर, गंभीर और अमृत से परिपूर्ण है, मैं कब सुनूँगा? उस महान राजा के मुख से शुभ, स्पष्ट, वेदों के अनुकूल, सुन्दर श्लोकों और अर्थों से युक्त, 'वैदर्भि!' संबोधन से युक्त और मेरे शोक का नाश करने वाली वाणी मैं कब सुनूँगा? 57-58 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निषादराज नल की वह मधुर वाणी, जो मेघों की गर्जना के समान मधुर, गंभीर और अमृत से परिपूर्ण है, मैं कब सुनूँगा? उस महान राजा के मुख से शुभ, स्पष्ट, वेदों के अनुकूल, सुन्दर श्लोकों और अर्थों से युक्त, 'वैदर्भि!' संबोधन से युक्त और मेरे शोक का नाश करने वाली वाणी मैं कब सुनूँगा? 57-58 1/2॥
When will I hear that sweet voice of Nishadharaj Nala, as sweet as the thunder of clouds, solemn and full of nectar? When will I hear from the mouth of that great king an auspicious, clear, in accordance with the Vedas, with beautiful verses and meanings, with the address 'Vaidarbhi!' and which will destroy my grief. 57-58 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥