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mahabharat 3.64.54-56h: मेरे परम यशस्वी स्वामी निषधराज नल हाथियों के राजा की चाल से चलते हैं। वे अत्यन्त बुद्धिमान, विशाल भुजाओं वाले, असंयमी (दुःख सहन न कर सकने वाले), पराक्रमी, धैर्यवान और वीर हैं। क्या आपने उन्हें कहीं देखा है? हे पर्वतश्रेष्ठ! मैं आपकी पुत्री के समान हूँ और (पति के वियोग में) अत्यन्त दुःखी हूँ। क्या आप आज अपने वचनों से मुझ असहाय स्त्री को, जो अकेली, व्याकुल और रो रही है, आश्वासन नहीं देंगे?॥ 54-55 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 54-56h
 
 
श्लोक  3.64.54-56h 
गजेन्द्रविक्रमो धीमान् दीर्घबाहुरमर्षण:।
विक्रान्त: सत्त्ववान् वीरो भर्ता मम महायशा:॥ ५४॥
निषधानामधिपति: कच्चिद् दृष्टस्त्वया नल:।
विलपतीं किमेकां मां पर्वतश्रेष्ठ विह्वलाम्॥ ५५॥
गिरा नाश्वासयस्यद्य स्वां सुतामिव दु:खिताम्।
 
 
अनुवाद
मेरे परम यशस्वी स्वामी निषधराज नल हाथियों के राजा की चाल से चलते हैं। वे अत्यन्त बुद्धिमान, विशाल भुजाओं वाले, असंयमी (दुःख सहन न कर सकने वाले), पराक्रमी, धैर्यवान और वीर हैं। क्या आपने उन्हें कहीं देखा है? हे पर्वतश्रेष्ठ! मैं आपकी पुत्री के समान हूँ और (पति के वियोग में) अत्यन्त दुःखी हूँ। क्या आप आज अपने वचनों से मुझ असहाय स्त्री को, जो अकेली, व्याकुल और रो रही है, आश्वासन नहीं देंगे?॥ 54-55 1/2॥
 
‘My highly renowned master Nishdharaja Nala walks with the gait of a king of elephants. He is very intelligent, has huge arms, is intemperate (unable to bear sorrow), is valiant, patient and brave. Have you seen him anywhere? O best of the mountains! I am like your daughter and am very sad (due to the separation from my husband). Will you not assure me, a helpless woman, who is alone and distressed and crying, with your words today?’॥ 54-55 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)