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mahabharat 3.64.53: हे पर्वतश्रेष्ठ! क्या आपने सैकड़ों गगनचुम्बी चोटियों से घिरे इस भयानक वन में कहीं राजा नल को देखा है?॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.64.53 
समुल्लिखद्भिरेतैर्हि त्वया शृङ्गशतैर्नृप:।
कच्चिद् दृष्टोऽचलश्रेष्ठ वनेऽस्मिन् दारुणे नल:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हे पर्वतश्रेष्ठ! क्या आपने सैकड़ों गगनचुम्बी चोटियों से घिरे इस भयानक वन में कहीं राजा नल को देखा है?॥ 53॥
 
'O best of mountains! Have you seen King Nala anywhere in this dreadful forest surrounded by hundreds of sky-high peaks?॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)